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कार्तिकेय

भगवान सुब्रमण्य (कार्तिकेय)

भगवान सुब्रमण्य (कार्तिकेय)
भगवान सुब्रमण्य (कार्तिकेय)
भगवान सुब्रमण्य (कार्तिकेय)

Significance

भगवान सुब्रमण्य, जिन्हें कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू परंपरा में युद्ध और विजय के देवता के रूप में पूजे जाते हैं। वे भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं, और अक्सर एक युवा योद्धा के रूप में दर्शाए जाते हैं, जिनकी मजबूत और साहसी स्वभाव होती है। कार्तिकेय को दानव तारकासुर के खिलाफ दिव्य बलों का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है, जो अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है। उन्हें विशेष रूप से दक्षिण भारत में पूजा जाता है और स्कंद शश्टी के त्योहार से जोड़ा जाता है, जो उनकी विजय का जश्न मनाता है। उनका महत्व ज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान के साधकों के लिए एक मार्गदर्शक और गुरु के रूप में भी बढ़ता है।

Iconography

भगवान सुब्रमण्य को पारंपरिक रूप से एक सुंदर युवा व्यक्ति के रूप में दर्शाया जाता है, जिनके छह चेहरे होते हैं, जो उनकी सर्वज्ञता का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे एक मोर पर सवार होते हैं, जो सुंदरता औरGrace का प्रतीक है, और अक्सर एक हाथ में एक भाला (वेल) पकड़े होते हैं, जो युद्ध में उनकी प्रवीणता को दर्शाता है। उनकी पोशाक आमतौर पर आभूषणों से सजी होती है और उन्हें एक मुकुट के साथ दर्शाया जाता है, जो उनकी दिव्य स्थिति को उजागर करता है। छह चेहरे कभी-कभी विभिन्न दिशाओं में दिखाए जाते हैं, जो उनके जीवन और ब्रह्मांड के सभी पहलुओं को देखने की क्षमता का प्रतीक है।

Family

वे भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं, और गणेश सहित भाई-बहन हैं।

ॐ सर्वाण भव्य नमः

Traditionally worshipped on tuesday

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